बैकलग को संभालने के लिए छात्रों को सही मानसिकता, प्रैक्टिकल प्लानिंग, और समय प्रबंधन की आवश्यकता है। उन्हें अपने सिलेबस का सही विश्लेषण करना चाहिए और शॉर्टकट्स से बचना चाहिए ताकि वे अपनी तैयारी को प्रभावी बना सकें।
0:00 हेलो बच्चों, इस वीडियो में आई विल टॉक अबाउट बैकलग और जो लगभग 90% बच्चों की प्रॉब्लम होती है जो भी जेई की तैयारी कर रहा होता है। तो देखो सबसे पहले आई वुड से कि जो आईआईटी जेई में जाने वाला बच्चा है ये ठीक है इंजीनियरिंग में जो जाने वाला बच्चा है उसकी रीजनिंग पावर और एनालिटिकल एबिलिटी अच्छी होनी चाहिए और होती है यूजली इसीलिए आईआईटीएस जो है वो आईएएस और बाकी के जो एग्जाम है जिनका इंजीनियरिंग से कोई लेना देना नहीं है वहां पे वो बहुत अच्छा करते हैं क्योंकि एनालिसिस की पावर बहुत अच्छी होती है। तो अगर आपका बैकलग हो गया है। अब आई एम नॉट गोइंग इंटू द डिटेल कि किस कारण से हुआ है। किसी भी कारण से हुआ है। एंड इफ यू आर जिसे बोलते है ना कि
0:31 रियलाइज्ड कि अब नहीं किया तो कुछ नहीं होगा और ये 2027 का ईयर भी ऐसे ही वेस्ट हो जाएगा तो दिस इज वेरी गुड ये रियलाइजेशन होना अपने आप में बहुत अच्छा बात है बट नाउ वी शुड बी सबसे पहले वी शुड बी प्रैक्टिकल उसका मतलब क्या है कि अगर आपको ये रियलाइजेशन 4 महीने पहले हो जाता या तीन महीने पहले हो जाता जो आपका रिजल्ट उस टाइम से मेहनत करके प्लानिंग करके जो आ सकता था डेफिनेटली अब नहीं आएगा वो कुछ ना कुछ कॉम्प्रोमाइज हो गया होगा आपकी कैपेबिलिटी के हिसाब से मतलब किसी बच्चे की कैपेबिलिटी अगर मान लिया 200 रैंक प्लानिंग की हुई तो अब डेफिनेटली उसके 300 400 500 रैंक आएगा। किसी की 2000 रैंक
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