इस प्रकार, कश्मीर का मुद्दा एक जटिल और बहुआयामी समस्या है, जिसे समझने और हल करने के लिए गहन अध्ययन और संवेदनशीलता की आवश्यकता है।
0:01 कश्मीर का जो मसला है मसला है कश्मीर उसका हमेशा से एक बहुत जबरदस्त इंटरनेशनल डायमेंशन रहा है। जनरल जिया ये कहता था कि ये सब ब्राह्मण की औलाद है। देखिए इनके बस का जिहाद करना नहीं है। नॉर्मल डिस्कशन हुआ कि भर आप इस आदमी को देखना इसकी आंखें कुछ और बोलती है। इसका चेहरा कुछ और बोलता है। और इसकी आंखों में जो है आपको एक सांप के जैसी जो है नो वो शैतानी फितरत मिलती है आपको।
0:31 इंदिरा गांधी जो है ना हमेशा इसको लेकर के बड़ी सशंकित रहती थी। मैं आसिम मुनीर को जनरल जियाउल हक और मुशर्रफ का एक मिश्रण मानता हूं। तो फिर हथियार उन्हें कैसे सौंपे? एक बस चलती थी श्रीनगर से। श्रीनगर सोपोर श्रीनगर सोपोर और उसमें जोड़ देते थे ओपोर। श्रीनगर सोपोर ओपोर। धीरे से बोलते मतलब उस पार छोड़ेंगे आपको। अमेरिका के स्टेक्स तो उसमें अमेरिका के देखिए अमेरिका के स्टेक्स तो शुरू से रहे हैं इस रीजन के अंदर। इंदिरा गांधी ने 1971 के अंदर जो पाकिस्तान को हराया वो बेसिकली अमेरिका को हराया था। आज आप जो देख रहे हैं बांग्लादेश में जमात इस्लामी को अमेरिका एंगेज कर रहा है। कोई नई बात नहीं
1:07 है ये। इसके आपके पास हिस्टोरिकल प्रेसिडेंट्स हैं। पॉलिटिकल स्टेक्स क्या थी वहां पे जो पार्टीज थी उनका क्या रोल रहा है इस पूरे जिहाद को बढ़ाने में? मुफ्ती मोहम्मद सईद और पीडीपी के जो कश्मीर में जो जमात इस्लामी के साथ जो ताल्लुकात रहे हैं वो तो जग जाहिर है। बुरहान वाणी का जब एनकाउंटर किलिंग हुआ था तो उसके बाद महबूबा ने कितना आफत मचाई थी आप जानते ही हैं। इनफैक्ट कई सारे मिनिस्टर्स और कई सारे बड़े लीडर्स जो पीडीपी के हैं उनके बारे में तो यहां तक कहा गया कि उनकी कार के अंदर टेररिस्ट ने ट्रैवल तक किया है।
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